खनिज माफियाओं को अभयदान

100 खदानें चल रही नियम विरुद्ध, कार्रवाई सिर्फ बीस पर

मंदसौर: जिले में संचालित 100 से अधिक खदानें नियम विरुद्ध व खनिज अधिकारियों की सांठगांठ से चल रही हैं। सालभर में कलेक्टर द्वारा दो बार दिए निर्देश के बाद भी अब तक कार्रवाई नहीं होने से होता है। हालात ये रहे कि पहले निर्देश पर तो अधिकारियों ने जांच किए बगैर ही ओके रिपोर्ट दे दी। दूसरे निर्देश के बाद जांच हुई और उसमें कमियां ही कमियां मिलीं लेकिन कार्रवाई के नाम पर अब तक कोई कदम नहीं उठाया गया। इसके बाद दो माह पूर्व फिर कलेक्टर ने खनिज विभाग को रिमांड पर लिया। इसके बाद कलेक्टर को दिखाने के लिए बीस खदानों पर कार्रवाई कर विभाग ने इति श्री कर ली है।
52 लाख का अर्थदंड
प्रभारी खनिज अधिकारी द्वारा जिले में 126 खदानों की जॉच प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया । जिसमें 20 प्रकरणों में अनियमिताऐं पायी जाने पर भुवानीलाल गुर्जर निवासी खेड़ाखदान, आजादसिंह निवासी पीपल्यामंडी, बद्रीलाल पाटीदार निवासी बाबुल्दा, विनोदसिंह निवासी आबाखेड़ी, प्रतीकसिंह ू, श्रीमती लक्ष्मीकुंवर निवासी मकड़ावन एवं श्रीमती अनीता फरक्या निवासी सीतामऊ पर पर्यावरण, प्रदुषण एवं अनुबंध की शर्तो का उल्लंघन करने पर कुल 52 लाख रूपये का अर्थदंड़ आरोपित किया है।इसके अतिरिक्त अजीमबाबू निवासी मंदसौर, रमेशचंद्र गुप्ता निवासी पीपल्यामंड़ी, राकेश गोयल निवासी मंदसौर, बशीर गढ़वी निवासी मुल्तानपुरा को स्वीकृत शैल खनिज पट्टे एवं शकीलएहमद निवासी चित्तोडग़ढ़ को स्वीकृत लेटेराईट खनिज का खनि पट्टा निरस्त करने संबंधी प्रस्ताव शासन को प्रेषित किया गया है। 4 उत्खनि पट्टे निरस्त करने तथा 2 उत्खनि पट्टों को व्यपगत घोषित करने की कार्यवाही की गयी है।
12 युवक व बच्चों की हो चुकी है मौत
कुछ माह पहले नियम विरुद्ध संचालित खदानों से भले ही जिम्मेदार विभाग व अधिकारियों को कोई फर्क नहीं पड़े लेकिन इनमें डूबकर जान गंवा चुके युवकों व किशोरों के परिजन पर बहुत फर्क पड़ता है। 3 अगस्त को मूंदड़ी खदान में डूबने से 4 किशोरों की मौत हो गई थी। इससे पूर्व भी चालू व बंद खदानों में करीब 8 युवकों व बच्चों की मौत हो चुकी है। जानकारी के अनुसार कलेक्टर ने 27 नवंबर 2021 को 4 दिनों के भीतर खदानों के चेकलिस्ट देने के निर्देश दिए थे। 20 दिन बाद भी अधिकारियों ने कुछ ही खदानों की रिपोर्ट सौंपी, इसमें भी ओके रिपोर्ट दी। अगस्त माह में मूंदेड़ी में हादसा हुआ, इसके बाद फिर कलेक्टर ने सख्ती कर निर्देश दिए।
फिर कैसे मिल गई एनओसी
नियमानुसार खदानों को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अनुमति लेना होती है। जानकारी के अनुसार तार फेंसिंग के साथ खदानों पर पौधरोपण किया जाना आवश्यक है। साथ ही नियमानुसार वैधानिक लाइसेंसधारी के विस्फोटक का उपयोग करना होता है। इसके अलावा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अन्य शर्तों का भी पालन करना होता है। जांच के दौरान ऐसा कुछ नहीं मिला। अब सवाल है कि इतनी खामियों के बाद भी खदानों को प्रदूषण बोर्ड से अनुमति कैसे प्राप्त हो गई।

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