भारी विरोध के चलते रखा बागड़ी की नियुक्ति को होल्ड पर

सियासत

अरविंद बागड़ी इंदौर के विवादास्पद कांग्रेसी नेताओं में से एक हैं।कांग्रेस में उनकी छवि फूल छाप कांग्रेसी की है। अग्रवाल समाज के अंदरूनी मामलों में भी अनेक बार अरविंद बागड़ी विवादों में आए हैं।नतीजा यह हुआ कि मात्र डेढ़ घंटे में उनकी नियुक्ति को होल्ड कर दिया गया। सूत्रों का कहना है कि अरविंद बागड़ी की नियुक्ति की खबर लगते ही कांग्रेस में उनका व्यापक विरोध प्रारंभ हो गया। यहां तक कि अनेक कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने उनके पुतले तक जलाएं। सैकड़ों कार्यकर्ता भोपाल पहुंचे और उन्होंने कमलनाथ से मिलकर अरविंद बागड़ी की शिकायत की तथा सिलसिलेवार उनके बारे में जानकारी दी।

आलाकमान तक भी यह जानकारी पहुंची। नतीजा यह हुआ कि प्रदेश प्रभारी जेपी अग्रवाल ने उनकी नियुक्ति को होल्ड कर दिया। यानी वे मात्र डेढ़ घंटे के अध्यक्ष साबित हुए। विनय बाकलीवाल ने जेपी अग्रवाल का पत्र प्रसारित होते ही तत्काल गांधी भवन पहुंचकर फिर से अध्यक्ष पद का काम संभाल लिया। सूत्रों का कहना है कि शहर कांग्रेस अध्यक्ष के विवाद के कारण अब नई नियुक्ति होगी।यानी ना तो विनय बाकलीवाल और ना ही अरविंद बागड़ी को अध्यक्ष बनाया जाएगा बल्कि उनके स्थान पर किसी तीसरे नेता को अध्यक्ष पद पर लाया जाएगा। अरविंद बागड़ी का विरोध करने वालों में कमलनाथ और दिग्विजय सिंह दोनों के समर्थक शामिल थे। कुल मिलाकर इस प्रकरण ने पहले से ही कमजोर कांग्रेस को इंदौर नगर में और कमजोर कर दिया। कॉन्ग्रेस अपने ही नेताओं के कारण उपहास का पात्र बन गई।

भाजपा के लिए अच्छे संकेत नहीं है चुनाव परिणाम

प्रदेश में 19 नगर पंचायतों और नगर परिषद के चुनाव परिणाम आ गए हैं इनमें से भाजपा को 11 और कांग्रेस को आठ नगरीय निकायों में सफलता मिली है। भाजपा और कांग्रेस के पार्षदों की संख्या का अंतर केवल 40 है। इस दृष्टि से यह चुनाव परिणाम भाजपा के लिए खतरे की घंटी है। भाजपा को खासतौर पर धार जिले में नुकसान हुआ है जहां उसने केवल 3 निकायों में सफलता प्राप्त की जबकि छह में उसे पराजय का सामना करना पड़ा। भाजपा ने धार और मनावर नगर पालिका और नगर परिषदों में कांग्रेस को झटका दिया लेकिन कुक्षी और पीथमपुर की नगर परिषद उसके हाथ से चली गई। पीथमपुर की नगर परिषद धार में अलग महत्व रखती है क्योंकि औद्योगिक क्षेत्र होने के कारण इस नगर परिषद का बजट धार जिले की अन्य नगर परिषदों के मुकाबले काफी अधिक होता है।

पीथमपुर विक्रम वर्मा के समर्थकों का गढ़ है लेकिन इस बार जिस तरह से टिकट वितरण किया गया उससे पीथमपुर में नाराजगी थी। इस वजह से यहां के चुनाव परिणाम विपरीत आए हैं। राजगढ़ और सरदारपुर में भी भाजपा को झटका लगा है। कुल मिलाकर धार जिले के चुनाव परिणाम भाजपा के लिए एक सबक हैं। यदि भाजपा ने इन चुनाव परिणामों की चेतावनी को नहीं समझा तो उसे नुकसान हो सकता है। वैसे देखने में यह आया है कि भाजपा को इस समय निमाड़ अंचल में तकलीफ हो रही है। पार्टी को निमाड़ अंचल पर अधिक फोकस करना पड़ेगा। इस अंचल में आदिवासी समुदाय का एक तरफा वर्चस्व है। निमाड़ के सभी जिलों में पर्याप्त संख्या में आदिवासी रहते हैं इस कारण से निमाड़ अंचल पर भाजपा को विशेष ध्यान देना होगा।

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