सीएम हेल्पलाईन में पहुंचीं नौ हजार शिकायतें

राजस्व, खाद्य आपूर्ति, ऊर्जा,पीएचई,जिला पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की सर्वाधिक शिकायतें,भोपाल के अधिकारियों के यहां भी लंबित हैं शिकायतें

सिंगरौली : सीएम हेल्पलाईन में जिले की करीब 8900 शिकायतें पहुंच चुकी हैं। जिसमें राजस्व, खाद्य आपूर्ति, ऊर्जा, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, पुलिस, संस्थागत वित्त, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, पंचायती राज के सर्वाधिक शिकायतें हैं। हैरानी की बात है कि एल-1 से ज्यादा एल-4 लेवल के अधिकारियों के यहां शिकायतों का अंबार लगा हुआ है। शिकायतकर्ता निराकरण के आस में बैठे हुए हैं।दरअसल प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सीएम हेल्पलाईन की शुरूआत कर लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए हेल्पलाईन बनाया। ताकि लोग अपनी शिक ायतें भोपाल दर्ज करायें, जिसका तत्काल निराकरण कराया जायेगा। इसके लिए बकायदे ब्लाक स्तर से लेकर सचिवालय भोपाल तक के अधिकारियों को भी जबावदेही सौंपी गयी है। एल-1 ब्लाक/तहसील/थाना, एल-2 जिला, एल-3 संभागीय अधिकारी एवं एल-4 भोपाल के सचिव स्तर को शिकायतों के निराकरण के लिए जिम्मेदारी सौंपी गयी है।

दिसम्बर महीने के प्रथम सप्ताह में प्राप्त ताजा आंकड़ों के मुताबिक 115 उप विभागों के एल-1 स्तर के 3559, एल-2 स्तर के 915, एल-3 स्तर के 1082 एवं एल-4 स्तर के 3328 शिकायतें लंबित पड़ी हुई हैं। इनका कुल आंकड़ा 8884 है। जानकारी के मुताबिक एल-4 स्तर के शिकायतों का निराकरण नहीं हो पा रहा है। ऐसे शिकायतों का आंकड़ा 3300 के पार है। जिसमें राजस्व, खाद्य आपूर्ति, ऊर्जा, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, पुलिस, संस्थागत वित्त, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, मनरेगा, पंचायती राज, प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण, सामाजिक न्याय एवं नि:शक्त कल्याण विभाग, राज्य शिक्षा केन्द्र, जिला अस्पताल, महिला एवं बाल विकास, लोक शिक्षण, प्रसूति सहायता, म.प्र.भवन संनिर्माण एवं कर्मकार कल्याण मण्डल एवं संबल योजना संबंधित सीएम हेल्पलाईन शिकायतों का अम्बार लगा हुआ है। फिलहाल करीब 89 सौ सीएम हेल्पलाईन शिकायतों का इतना बड़ा आंकड़ा होना कहीं न कहीं सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर भी ऊंगलियां उठना लाजिमी है।

शिकायत कर्ताओं पर दबाव बनाने का चल रहा सिलसिला
शिकायतों को वापस लेने के लिए कई विभाग के ब्लाक एवं जिला स्तर के अधिकारी इस तरह दबाव बनाते हैं कि कई शिकायतकर्ता मजबूर होकर शिकायतों को बंद करा देते हैं। इस तरह का आरोप सबसे ज्यादा पुलिस एवं राजस्व विभाग पर लगता है। पुलिस पर आरोप है कि सीएम हेल्पलाईन में पहुंची शिकायतों को बंद कराने के लिए हर हथकंडे अपनाती है। कई बार मामला सार्वजनिक भी हो चुका है। इसी तरह राजस्व विभाग का मैदानी अमला भी शिकायतकर्ताओं पर तरह-तरह के दबाव देते हुए शिकायतों को बंद कराने में ऐंड़ी चोटी का दम लगा देते हैं। शिकायतकर्ता अंतत: विवश होकर शिकायतों को बंद करा देते हैं। चर्चाओं के मुताबिक 10 से 25 प्रतिशत ही वास्तविक समस्याओं का निराकरण हो पाता है।

सीएम हेल्पलाईन के लंबित शिकायतों की ताजा स्थिति
उप विभाग एल-1 एल-2 एल-3 एल-4 कुल
राजस्व विभाग/सीमांकन 348 61 115 575 1232
खाद्य आपूर्ति 449 79 84 475 1087
ऊर्जा विभाग 369 195 155 300 1019
पीएचई विभाग 234 51 38 83 406
पुलिस विभाग 333 11 7 26 377
संस्थागत वित्त 57 15 37 250 359
मनरेगा 230 35 65 28 358
भवन संनिर्माण,कर्मकार 92 30 69 442 633
व असंगठित,संबल
प्रसूति सहायता 123 75 37 39 274
लोक शिक्षण 79 2 34 124 239
महिला बाल विकास 70 44 53 71 238
पंचायती राज एवं जिपं 141 41 29 17 858
लोक स्वास्थ्य 73 28 29 90 220
भू-अर्जन 36 12 24 127 199
जिला अस्पताल 76 15 33 75 199
पीएम आवास यो.ग्रा. 84 52 40 23 199
सामाजिक न्याय 97 14 20 17 148
राज्य शिक्षा केन्द्र 29 3 7 94 135

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