युवाओं को राष्ट्र निर्माण का कर्णधार बनाए विविः राज्यपाल

ब्राउस का चतुर्थ दीक्षांत समारोह संपन्न
इंदौर: विश्वविद्यालय सदैव ज्ञान का केंद्र रहे हैं. विश्वविद्यालयों का काम मात्र डिग्री प्रदान करना नहीं है, अपितु युवाओं को देश की एकता, अखंडता, राष्ट्र निर्माण और विकास का कर्णधार बनाना है. इसके लिए सही रास्ता एवं मार्गदर्शन देने का काम शिक्षा संस्थानों को करना चाहिए. मध्यप्रदेश सरकार द्वारा अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा वंचित वर्ग के कल्याण पर विशेष जोर दिया जा रहा है. विश्वविद्यालय उच्च गुणवक्तापूर्ण शोध एवं शिक्षण को बढ़ावा देने की दिशा में कार्य करे.

उक्त बातें मध्यप्रदेश के राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति मंगुभाई पटेल ने डॉ. बी.आर.अम्बेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय के चतुर्थ दीक्षांत को संबोधित करते हुए कही. अध्यक्षीय भाषण देते हुए महामहिम ने कहा कि विश्वविद्यालय समाज के साथ जुड़कर, सामुदायिक विकास तथा युवाओं में अधिक व सशक्त नेतृत्वशीलता विकसित कर शाश्वत विकास के लक्ष्यों की प्राप्ति में सक्रिय योगदान करें. स्नातकों द्वारा ली गयी प्रतिज्ञा को उद्धृत करते हुए मादक पदार्थों के सेवन और भ्रष्टाचार से दूर रहने की बात कही. हमें सामाजिक समरसता के भाव को जीवन में उतारने की जरुरत है. डॉ. अम्बेडकर के जीवन दर्शन को आत्मसात कर एक स्वस्थ समाज की स्थापना करने की आवश्यकता है.
युवा गौरवशाली अतीत को पुनर्स्थापित करें
मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि युवाओं को आगे आकर भारत के गौरवशाली अतीत को पुनर्स्थापित करने की शुरूआत करनी चाहिए. तत्कालीन सामाजिक एवं जातिगत बुराइयों से निकलकर भारतवर्ष को कैसे आगे ले जाना है, इस चिंता को साकार रूप देने में बाबा साहब डॉ. अम्बेडकर का महत्वपूर्ण योगदान रहा है. डॉ. अम्बेडकर विश्वविद्यालय का विस्तार देश और प्रदेश भर में करना पहली प्राथमिकता पर है. उच्च शिक्षा और नवोन्मेषी पाठ्यक्रमों को शुरू करने सहित कृषि शिक्षा को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाना चाहिए.
अखंड भारतीय समाज देखना चाहते थे
बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय, लखनऊ के कुलाधिपति डॉ. प्रकाश सी. बरतूनिया ने दीक्षांत उद्बोधन में कहा कि डॉ. अम्बेडकर ने भारतीय समाज के विषय में अनेक मौलिक स्थापनाएँ प्रस्तुत की हैं. वे भारतीय समाज को अविछिन्न और अखंड देखना चाहते थे. डॉ. अम्बेडकर ने समाज की भौतिक परिस्थितियों को पहचानते हुए सामाजिक-आर्थिक समानता तथा विभिन्न वर्गों के बीच सामंजस्य स्थापित करने का प्रयास किया.

ज्ञान को प्रज्ञान में बदलने की जरूरत
विशिष्ट अतिथि के रूप में बोलते हुए संस्कृति, पर्यटन एवं अध्यात्म मंत्री सुश्री ऊषा ठाकुर ने कहा कि विश्वविद्यालय राष्ट्रहित की संस्था है. समस्याओं का समूल निदान मिल कर करने की जरुरत है. शपथ एक साधना है. दीक्षा उपादान से प्राप्त ज्ञान को प्रज्ञान में बदलने की जरुरत है.
शिक्षा समाज की प्रगति की आधारशिला
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डी.के.शर्मा ने कहा कि शिक्षा समाज की उन्नति एवं सभ्यता के प्रगति की आधारशिला है. विश्वविद्यालय केंद्रित शिक्षा का मूलभूत उद्देश्य जीवनमूल्यों को विकसित कर संस्कारों को परिष्कृत करना है. इदीक्षांत समारोह में कुलाधिपति द्वारा विभिन्न अध्ययनशालाओं के पीएच.डी. एवं एम.फिल. के 48 शोधार्थियों को उपाधि प्रदान की गयी. संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन कुल सचिव डॉ. अजय वर्मा ने किया.

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