जनसामान्य ने किया संविधान की मूल प्रति का अवलोकन

ग्वालियर: संविधान के बारे में सबने सुना है लेकिन कम ही लोग होंगे, जिन्होंने संविधान की मूल प्रति को देखा होगा। संविधान की मूल प्रति ग्वालियर की सेंट्रल लाइब्रेरी में रखी हुई है, जिसका सेकडों लोगों ने सेंट्रल लाइब्रेरी पहुँच कर अवलोकन किया।स्ंविधान लागू होने के समय देशभर में कुल 16 मूल प्रतियां जारी गयी थी। भारत सरकार ने एक मूल प्रति सिंधिया राजवंश को दी थी। 1950 में सिंधिया राजवंश को मिली यह मूल प्रति सन 1956 में महाराज बाड़ा स्थित सेंट्रल लायब्रेरी में सुरक्षित रखी गयी है। लायब्रेरी में यह प्रति 31 मार्च 1956 में आयी थी। लायब्रेरी के प्रबंधकों का कहना है कि संविधान का यह कागज बेहत उच्च गुणवत्ता वाला है जिसकी उम्र एक हजार साल तक रहेगी।

हर साल संविधान दिवस, गणतंत्र दिवस के मौके पर लायब्रेरी में संविधान की मूल प्रति लोगों के देखने के लिये रखी जाती है। आज भी यह ऐतिहासिक प्रति लोगों के अवलोकनार्थ रखी गई। सामान्य तौर पर यह अलमारी में सुरक्षित रहती है। जेयू में भी मनाया गया संविधान दिवस: जीवाजी विश्वविद्यालय के गालव सभागार एवं लॉ विभाग में संविधान दिवस के अवसर पर व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया। इस अवसर पर व्याख्याता डॉ.मनीष खेमरिया ने कहा कि दुनियाभर के तमाम संविधानों को बारीकी से देखने के बाद डॉ.अम्बेडकर ने भारतीय संविधान का मसौदा तैयार किया था। उन्होंने कहा कि भारत लोकतंत्र की जननी है।

भारतीय संविधान विश्व का सबसे बड़ा संविधान है जिसमें 470 अनुच्छेद एवं 12 अनुसूचियां है। यह संविधान 2 साल 11माह 18दिन में बनकर तैयार हुआ था। इस अवसर पर अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो.एसके द्विवेदी, डॉ.गणेश दुबे, प्रो.संजय कुलश्रेष्ठ, एडवोकेट जितेंद्र शर्मा, डॉ.शांतिदेव सिसौदिया, प्रो.एसके सिंह, डॉ.रामशंकर सिंह सहित छात्र एवं छात्राएं उपस्थित थे।कार्यक्रम का संचालन एवं आभार व्यक्त प्रो.एसके द्विवेदी ने किया।

नव भारत न्यूज

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