भाजपा ने 11 साल में बदले छह जिलाध्यक्ष

कांग्रेस ने बदला सिर्फ एक, युवा सिर्फ भीड़ बढ़ाने के लिए

मंदसौर: एक बार फिर विधानसभा की तैयारियां शुरु हो गई है। कोई भी खेल हो या संस्था या विभाग, टीम का कप्तान महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। इस बात को भाजपा ने बखूबी समझा। इसका परिणाम भी जिले में हर चुनाव में उसके लिए सकारात्मक रहा तो वहीं कांग्रेस को पुराने चेहरों से मोह छूट ही नहीं रहा। दस साल में भाजपा ने छह अध्यक्ष बदल दिए, लेकिन कांग्रेस ने सिर्फ एक बदला। उसमें भी किसी युवा को मौका नहीं दिया गया। जबकि पुतला दहन हो या धरना प्रदर्शन या सोशल मीडिया कई कांग्रेसी युवा नेता लगातार सक्रिय नजर आ रहे हैं। हाल ही में नगरीय निकाय चुनाव में भी एक तरफा हार के बाद जिलाध्यक्ष बदलने को लेकर खासी मांग उठी।
लगातार हर चुनाव में भाजपा ने दिखाया दम
भाजपा ने प्रदेश की सत्ता मिलते ही डेढ़ साल पहले मंदसौर भाजपा जिलाध्यक्ष की कमान युवा नानालाल अटोलिया को सौप दी। अटोलिया ने उम्मीद से बढकऱ पिछले जिलाध्यक्ष की तरह अपना दम दिखाया। बदलाव की इस बयार में मंदसौर में भाजपा सदैव मजबूत हुई हैं। पिछले दस सालों में भाजपा ग्राम पंचायत से लेकर नगरीय निकाय और विधानसभा, लोकसभा तक के चुनाव प्रचण्ड बहुमत से जीतती आई है बावजूद इसके भाजपा ने बदलाव करने में कभी भी कदम पीछे नहीं हटाएं ।दस साल में भाजपा ने 6 टॉ अध्यक्ष नानालाल अटोलिया के रूप में कार्यकर्ताओं में ऊर्जा भरने के लिये दे दिया लेकिन दस सालों में तमाम चुनाव हारने के बाद भी कांग्रेस अपने जिलाध्यक्ष के रूप में कोई नया चेहरा कार्यकर्ताओं को नहीं दे पाई।
रातडिय़ा की अगुवाई में कई हार झेली
ग्राम पंचायत से लेकर नगरीय निकाय, विधानसभा और लोकसभा तक के चुनाव कांग्रेस लगातार अपने जिलाध्यक्ष प्रकाश रातडिया की अगुवाई में हारती चली गई। 2009 के चुनाव मेंभाजपा के दिग्गज नेता डॉ लक्ष्मीनारायण पाण्डे को प्रचण्ड बहुमत से हराने वाली गांधी परिवार की निकटतम मीनाक्षी नटराजन जीति लेकिन कांग्रेस जिलाध्यक्ष प्रकाश रातडिया की अगुवाई में हुए 2014 के चुनाव मेंवहीं नटराजन भाजपा के वर्तमान सांसद सुधीर गुप्ता के सामने 3 लाख 3 हजार 669 मतों से पराजित हो गई और 2019 का चुनाव भी 3 लाख 76 हजार मतों के प्रचण्ड बहुमत से हार गईं।
नवकृष्ण पाटिल की कप्तानी कांग्रेस में कलह
एक के बाद एक चुनाव कांग्रेस पराजित होती रहीं लेकिन दस साल में कांग्रेस अपने जिलाध्यक्ष के रूप में नया चेहरा कार्यकर्ताओं को नहीं दे पाई। दस साल बाद नवकृष्ण पाटिल को अध्यक्ष बनाया गया। उनके अनुभवों का फायदा भी कंाग्रेस को नहीं मिला। हाल ही में नगरीय निकाय चुनाव में कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो गया। यहां तक ठीक है, लेकिन अंर्तकलह खुलकर सामने आया। यहां तक सोशल मीडिया पर पत्रों के माध्यम से खुली जंग एक दूसरे के सामने शुरु हो गई।
भाजपा ने दिया कई दिग्गजों को मौका
भाजपा लगातार अपने अध्यक्षों को बदलकर निरन्तर कार्यकर्ताओं को ऊर्जावान बना रहीं है जबकी प्रकाश रातडिया साल 2000 में अंतिम बार नगर पालिका का चुनाव लडे थे और तत्कालिक नपध्यक्ष के भाजपा उम्मीदवार और वर्तमान विधायक यशपालसिंह सिसोदिया के सामने पराजित हुए थे इसके बाद से ही उन्होने कोई चुनाव नहीं लडा और साल 2011 से अब तक निरन्तर कांग्रेस के जिलाध्यक्ष पद पर काबिज है जबकी इस अवधी में भाजपा ने जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष रहें मदनलाल राठौर, सांसद सुधीर गुप्ता, विधायक देवीलाल धाकड़, पूर्व विधायक चंदरसिंह सिसोदिया और बैंक अध्यक्ष राजेन्द्र सुराणा, नानालाल अटोलिया को मौका दिया है। ये भाजपा नेता जैसे ही किसी चुनाव को जीते या चुनाव मैदान में उतरे जिलाध्यक्ष पद छोड़ दिया।
कांग्रेस में एक, भाजपा ने बदले छह
साल 2000 में नपाध्यक्ष का चुनाव हारे।2011 में कांग्रेस जिलाध्यक्ष बनें तब से अब तक इसी पद पर काबिज है।साल 2013 भाजपा में मदनलाल राठौर जिलाध्यक्ष रहें इसके अलावा वे जिला पंचायत व जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष रहें।साल 2013 से लगातार तीन वर्षो तक सुधीर गुप्ता भाजपा जिलाध्यक्ष रहें।साल 2014 में वे सांसद चूने गये और लगातार दो बार कांग्रेस में गांधी परिवार की निकटतम मीनाक्षी नटराजन को प्रचण्ड बहुमत से पराजित कर चूके है।साल 2016 में वर्तमान विधायक देवीलाल धाकड़ भाजपा जिलाध्यक्ष मनोनित हुए, लेकिन 2018 में गरोठ विधानसभा चुनाव मैदान में उतरने के बाद जिलाध्यक्ष पद छोड दिया और विधायक निर्वाचित हो गये।साल 2018 में गरोठ क्षेत्र से विधायक रहें चंदरसिंह सिसोदिया को भाजपा ने अपना जिलाध्यक्ष बनाया कुछ माह तक वे इस पद पर रहे।साल 2018 के आखरी में जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष रहे राजेन्द्र सुराणा को भाजपा ने अपना जिलाध्यक्ष बनाया अब तक वे इस पद पर काबिज थे। सुराणा बैंक अध्यक्ष रहने के अलावा जनपद के अध्यक्ष भी रहे। इसके बाद नानालाल अटोलिया को कमान सौंपी गई।

नव भारत न्यूज

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