रेडियोलॉजी जांच सुविधा के विस्तार-मिशन का शुभारंभ किया वी.के. सिंह

नयी दिल्ली,  (वार्ता) देश में मुनासिब दर पर रेडियोलॉजी (विकिरण विज्ञान) पर आधारित स्वास्थ्य परीक्षण सुविधाओं के विस्तार के लिए शुरू किए गए एक अभियान मिशन रेडियोलॉजी इंडिया (एमआरआई) का केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग एवं नागर विमानन राज्य मंत्री जनरल (सेवानिवृत्त) वी के सिंह ने शनिवार को राजधानी में औपचारिक उद्घाटन किया।

उन्होंने इस अवसर पर मिशन रेडियोलॉजी इंडिया के विशेष रूप से तैयार किये गये ‘माय स्टाम्प’ भी जारी किया ।
इस मौके पर दिल्ली सर्कल के पोस्ट मास्टर जनरल (ऑपरेशंस) अशोक कुमार ने डाक टिकट का पहला अलबम मंत्री को भेंट किया।

आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार एमआरआई पहल संदीप शर्मा फाउंडेशन की एक सामाजिक पहल है।
इसका उद्देश्य प्रत्येक भारतीय को उनके घर के नजदीक उचित डायग्नॉस्टिक सेवा मुहैया करना और पहुंच में सुधार और सस्ती सेवा के साथ बीमारी के बोझ को कम करना है।
इसका लक्ष्य देश भर में ऐसे डायग्नॉस्टिक सेंटर्स के नेटवर्क का निर्माण करेगा जो स्थापित दिशानिर्देशों का पालन करेंगे और संबंधित हितधारकों द्वारा समग्र रूप से इसकी निगरानी की जाएगी।

ये केंद्र मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग 1.5 टी, कंप्यूटेड टोमोग्राफी, डिजिटल एक्सरे, टेली कंसल्टेशन और पैथोलॉजी सेवाओं समेत अन्य के साथ उत्कृष्ट सेवाओं की पेशकश करेंगे।

‘माय स्टाम्प’ का अनावरण करते हुए केंद्रीय मंत्री जनरल सिंह ने इस हल के लिए संदीप शर्मा फाउंडेशन की सराहना की।
उन्होंने विश्वास जताया कि “मिशन रेडियोलॉजी इंडिया शहरी और ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा के बीच मौजूद अंतर को पाटते हुए भारतीय स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में नए युग की शुरुआत करेगा।
” उन्होंने कहा कि यह मिशन “ आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी पीए-जेएवाई) और आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन समेत भारत सरकार के महत्वाकांक्षी स्वास्थ्य सेवा कार्यक्रमों को मदद देगा।’
फाउंडेशन के संस्थापक, सामाजिक-राजनीतिक उद्यमी संदीप शर्मा ने कहा, ‘हमारा नजरिया भारत की जरूरतमंद आबादी को किफायती डायग्नॉस्टिक सेवा मुहैया कराना है।
समाज के बेहतर फायदे के लिए सभी सामाजिक संगठनों, कॉरपोरेट्स, सरकार और एनजीओ को साथ आना होगा ताकि 748 जिलों में एमआरआई के लिए स्वपोषित फिजिकल और कॉमन डिजिटल प्लेटफॉर्म को तैयार करने में मदद मिल सके।’
उन्होंने महात्मा गांधी के एक कथन का उल्लेख किया कि अगर रोग की सही जांच हो जाए तो तीन-चौथाई इलाज अपने आप हो जाता है।

फाउंडेशन के बयान में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सकीय सुविधाओं के भारी अंतर का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि 60 प्रतिशत से अधिक अस्पताल, 70 प्रतिशत से अधिक डिस्‍पेंसरी और 80 प्रतिशत बेहतर ढंग से प्रशिक्षित और योग्य डॉक्टर केवल शहरी इलाकों में ही काम करते हैं।

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