नौसेना को मिला मोरमुगाओ युद्धपोत

नयी दिल्ली 24 नवम्बर (वार्ता) अत्याधुनिक मिसाइल और अन्य हथियारों से लैस मोरमुगाओ युद्धपोत आज नौसेना को मिल गया जिससे उसकी मारक क्षमता कई गुना बढ गयी है।
मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) ने नौसेना को परियोजना 15 बी श्रेणी का दूसरा पोत विध्वंसक यानी यार्ड 12705 (मोरमुगाओ) गुरूवार को सुपुर्द किया।
स्वदेशी इस्पात से बनाया गया यह पोत नौसेना के सबसे बड़े विध्वंसकों में एक है जिसकी लंबाई 164 मीटर और वजन 75000 टन से अधिक है। यह पोत समुद्री युद्ध के पूर्ण स्पेक्ट्रम में फैले विभिन्न प्रकार के कार्यों और मिशनों को पूरा करने में सक्षम है। इसे सतह से सतह पर मार करने वाली सुपरसोनिक ‘ब्रह्मोस’ मिसाइल और लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली ‘बराक-8’ मिसाइलों से लैस किया गया है। पानी के अंदर युद्ध करने के लिए इसमें स्वदेशी पनडुब्बी रोधी हथियार और सेंसर, हेवी वेट टॉरपीडो ट्यूब लॉन्चर और रॉकेट लॉन्चर लगाया गया है।
नौसेना के अन्य विध्वंसक और पोतों की तुलना में यह अधिक बहुमुखी है तथा दुश्मन पनडुब्बियों, युद्धपोतों, युद्धपोत रोधी मिसाइलों और लड़ाकू विमानों के विरुद्ध मोरमुगाओ की क्षमता इसे सहायक जहाजों के बिना संचालित करने में और नौसेना टास्क फोर्स के फ्लैगशिप के रूप में कार्य करने में सक्षम बनाती है।
इस युद्धपोत पर 312 नाविकों तथा अधिकारियों को तैनात किया जा सकता है। यह एक बार में 4000 समुद्री मील की दूरी तय करने की क्षमता रखता है और 42 दिन तक संचालन कर सकता है। दो हेलिकॉप्टरों से लैस होने से पोत की क्षमता बढ जाती है। यह 30 समुद्री मील यानी करीब 55 किमी प्रति घंटे से अधिक की गति से चलने में सक्षम है। इस श्रेणी के युद्धपोतों में 72 प्रतिशत साजो सामान स्वदेशी है। इस श्रेणी का पहला युद्धपोत विशाखापत्तनम पिछले वर्ष 21 नवंबर को नौसेना के बेड़े में शामिल किया गया था। तीसरा जहाज (इम्फाल) 20 अप्रैल 2019 को लॉन्च किया गया था और चौथे जहाज (सूरत) को 17 मई 2022 को लॉन्च किया गया था

नव भारत न्यूज

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