संघ को मॉडरेट करने का नवाचार कर रहे हैं मोहन भागवत

ग्राम विकास, पर्यावरण संरक्षण, कुटुंब प्रबोधन, गणवेश परिवर्तन, वामपंथी बुद्धिजीवियों से संवाद, समाज प्रमुखों के साथ लगातार बैठकें और अब मुस्लिम बुद्धिजीवियों और धार्मिक उलेमाओं के साथ संवाद कर सरसंघचालक मोहन भागवत संघ की छवि बदलने की कवायद कर रहे हैं

मिलिंद मुजुमदार

इंदौर : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत संघ की छवि बदलने की कवायद कर रहे हैं। वे लगातार संघ को मॉडरेट बनाने का नवाचार कर रहे हैं। 2009 में सरसंघचालक बनने के बाद से ही डॉक्टर मोहन भागवत ने ग्राम विकास, पर्यावरण संरक्षण, कुटुंब प्रबोधन, गणवेश परिवर्तन, वामपंथी बुद्धिजीवियों से संवाद, समाज प्रमुखों के साथ लगातार बैठकों पर जोर दिया है। संघ प्रमुख इन दिनों मुस्लिम बुद्धिजीवियों और धार्मिक उलेमाओं के साथ संवाद कर संघ की विचारधारा और राष्ट्रवाद के आंदोलन के बारे में उन्हें समझा रहे हैं। डॉक्टर मोहन भागवत की इस पहल का व्यापक स्वागत हो रहा है। इससे सौहार्द्र और सद्भाव की दृष्टि से सकारात्मक संदेश गया है।

मुस्लिम बुद्धिजीवियों ने संघ प्रमुख से आग्रह किया कि इस तरह के संवाद लगातार होने चाहिए। डॉक्टर मोहन भागवत ने सरसंघचालक बनने के बाद से लगातार नवाचार किया है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण और ग्राम विकास के बारे में संघ में अलग से संगठन बनाए हैं। भारतीय किसान संघ को कहा गया कि वह केवल किसानों की समस्याएं उठाने और आंदोलन करने का काम ना करें बल्कि किसानों को उन्नत कृषि और प्राकृतिक संसाधनों और तकनीक के साथ कृषि करना भी सिखाए। इसी तरह विश्व हिंदू परिषद से भी कहा गया कि वह आदिवासियों और दलितों के बीच ज्यादा से ज्यादा काम करें तथा हिंदू समाज को संगठित करने के अलावा समाज में व्याप्त कुरीतियों को भी दूर करने का प्रयास करें।

परिवार व्यवस्था पर प्रयास

उदारीकरण के बाद भारत की परिवार व्यवस्था पर सबसे अधिक चोंट पहुंची है। संघ का मानना रहा है कि परिवार व्यवस्था के कारण हमारी संस्कृति बची रही और धर्म की रक्षा होती रही। इस कारण से परिवार व्यवस्था को बचाना बेहद जरूरी है। इसके लिए डॉक्टर भागवत ने संघ में कुटुंब प्रबोधन जैसा नया विभाग प्रारंभ किया। जो समाज को कुटुंब व्यवस्था के बारे में बताता है।

डॉक्टर भागवत पहले सरसंघचालक जिन्होंने विरोधियों को शाखा में आने का निमंत्रण दिया

संघ प्रमुख पहले सरसंघचालक हैं जिन्होंने संघ विरोधियों से संवाद कर उन्हें संघ की कार्यप्रणाली और विचारधारा समझने के लिए शाखा में आने के लिए निमंत्रण दिया। उन्होंने लगातार वामपंथी बुद्धिजीवियों से भी संवाद करने की कोशिश की है । 2 वर्ष पूर्व दिल्ली के विज्ञान भवन में 2 दिनों तक लगातार इस संबंध में कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहे। सूत्रों का कहना है कि मोहन भागवत जानते हैं कि संघ के पास कार्यकर्ताओं की विराट ऊर्जा है। वे इसका उपयोग सामाजिक कार्यक्रम को आगे बढ़ाने में करना चाहते हैं। संघ प्रमुख के इन प्रयासों का मकसद लंबे समय से चली आ रही गलतफहमी को दूर करना है। ऐसा करते समय डॉक्टर भागवत ने संघ के मूल सिद्धांतों के साथ समझौता नहीं किया है। ना ही उन्होंने संघ के प्राण माने जाने वाली दैनंदिन शाखा पद्धति में कोई परिवर्तन किया है।

भविष्य के 25 वर्षों का रोड मैप बना रहा है संघ

सूत्रों का कहना है कि संघ देश के समक्ष आने वाले 25 वर्षों की चुनौतियों को सामने रखकर काम कर रहा है। वह 2050 तक का रोड मैप बनाना चाहता है ताकि भारत को परम वैभव के शिखर तक ले जाए जा सके। संघ के थिंकटैंक को इस बात का एहसास है कि आने वाले समय में भारत के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती सांप्रदायिकता और इससे उपजे विवाद होंगे। भारत में मुस्लिमों की आबादी आज 18 फ़ीसदी के लगभग है । ढाई दशक बाद यह आबादी 28 से 30 फ़ीसदी होने की संभावना है। ऐसे में यदि इतनी बड़ी मुस्लिम जनसंख्या को कट्टरपंथियों के हवाले छोड़ दिया गया तो देश में सांप्रदायिक विवादों की संख्या में अत्यधिक वृद्धि हो सकती है, जो देश की आर्थिक प्रगति में सबसे बड़ी बाधा साबित होने वाली है। इसी के मद्देनजर संघ लगातार मुस्लिम बुद्धिजीवियों और धार्मिक उलेमाओं से संवाद कर रहा है ताकि मुस्लिम संघ के राष्ट्रवादी आंदोलन को समझ सके और उसमें हिस्सा ले सके।

मूल विचारधारा से समझौता नहीं

संघ मुस्लिमों और ईसाइयों से लगातार संवाद रखेगा लेकिन वह अपने मूल विचार से जरा भी नहीं हटेगा। संघ का कार्यकर्ता निर्माण और मातृभूमि की वंदना का अपना 100 वर्ष पुराना आंदोलन लगातार जारी रहेगा। राष्ट्रवाद संघ की मूल प्रेरणा है। संघ हिंदुत्व और राष्ट्रियत्व में अंतर नहीं करता। संघ की मुस्लिमों से संवाद करने की मुहिम का लक्ष्य मुसलमानों को इस बात का एहसास दिलाना है कि भारत उनकी भी मातृभूमि है तथा हिंदुओं और मुस्लिमों के हित, संस्कृति और पूर्वज सांझें हैं। यदि मुस्लिमों को यह तथ्य समझ में आ गया तो ही देश में स्थाई शांति हो सकती हैं। मुस्लिम कट्टरपंथी भारतीय मुसलमानों को मुगलों और विदेशी आक्रांताओं से जोड़ते हैं इससे समस्या पैदा होती हैं

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