हाईकोर्ट की शरण में पूर्व बिशप, राजदार ने उगले राज

जबलपुर: आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) के शिकंजे में फंसने के बाद जेल भेजे गए बोर्ड ऑफ एजुकेशन चर्च ऑफ नार्थ इंडिया जबलपुर डायोसिस के पूर्व बिशप पीसी सिंह ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की शरण ली हैं। हाईकोर्ट में जमानत अर्जी दायर की। जिस पर प्रारंभिक सुनवाई हुई। जिस पर ईओडब्ल्यू ने जमानत देने का विरोध किया। ईओडब्ल्यू ने कहा कि जमानत दिए जाने पर पीसी सिंह उर्फ प्रेमचंद साक्ष्य को प्रभावित कर सकता हैं। इसके बाद कोर्ट ने केस डायरी तलब की। मामले की अगली सुनवाई 30 सितम्बर को होगी। इधर पूर्व बिशप के राजदार सुरेश जैकब से भी ईओडब्ल्यू ने पूछताछ शुरू कर दी हैं। जिसने कई राज उगले हैंं।
छापेमारी के बाद से गायब चल रहा था जैकब
विदित हो कि पीसी सिंह का राजदार फंड मैनेजर सुरेश जैकब छापेमारी कार्रवाई के बाद से लगातार गायब चल रहा था। जिसकी तलाश में ईओडब्ल्यू की टीमें लगी हुई हैं। पूछताछ के लिए उसे नोटिस भी जारी किए जा चुके हैं परंतु वह बयान देने नही पहुंचा रहा था। विगत दिवस ईओडब्ल्यू ने उसके खिलाफ जारी नोटिस की तामील कराई हैं। उसने सोमवार को ईओडब्ल्यू कार्यालय पहुंचकर बयान दर्ज कराने का आश्वासन भी दिया था।
घंटों चली पूछताछ में कई राजफाश किए
सूत्रों के मुताबिक सोमवार को ईओडब्ल्यू कार्यालय पहुंचे जैकब से टीम ने घंटों पूछताछ की। इस दौरान पहले तो उसने टीम को गुमराह करने का प्रयास किया लेकिन जब उससे सघन पूछताछ शुरू की गई तो उसने राज उगलना शुरू कर दिए। सूत्रों के मुताबिक जैकब पूर्व बिशप का सबसे भरोसेमंद हैं। सुरेश जैकब द्वारा ही शिक्षण संस्थानों से मिलने वाली फीस को पीसी सिंह के निजी खातों में खुर्द-बुर्द किया जाता था। ईओडब्ल्यू ने जांच में यह भी पाया कि शिक्षण संस्थानों की एफडी को भी सुरेश जैकब ने तोडक़र उस राशि को पीसी सिंह के खाते में ट्रांसर्फर कर दिया था।
ऐसे बन गया पीसी सिंह का खास गुर्गा
सूत्र बताते हैं कि क्रिश्चियन स्कूल में पढ़ाई के बाद जैकब वायु सेना में नौकरी करने चला गया था। वह बतौर एयरमैन तैनात था। वायु सेना में 15 वर्ष की सेवा के उपरांत वह जबलपुर लौटा और भारतीय स्टेट बैंक में सुरक्षा गार्ड की नौकरी करने लगा। इस दौरान उसकी मुलाकात पीसी सिंह से हुई और वह उसका खास गुर्गा बन गया। पीसी सिंह ने जैकब को कई संस्थाओं में मैनेजर बना दिया जिसके बाद जैकब उसके काले कारमानों में उसका साथ देने लगा था।
पत्नी वसूलती थी चंदा, पति करता था हजम, लेखापालों के बयान दर्ज-
डायोसिस व संस्था द्वारा संचालित स्कूलों को भी पीसी सिंह ने लाखों का चूना लगाया हैं। आयोजनों के नाम पर लाखों रूपए खर्च किए जाते थे। जबकि आयोजनों में ज्यादा राशि खर्च नहीं होती थी शेष रकम वह हजम कर जाता था। स्कूलों के लेखापालों से पूछताछ कर उनके बयान दर्ज कर लिए गए हैं। जांच टीम अब इस बात का पता लगाने में जुट गई हैं कि उसके नेतृत्व मेंंअब तक कितने आयोजन हुए और इसमें कितना खर्च किया गया और पीसी सिंह ने अपने पास कितनी राशि रखी। जांच में यह बात भी सामने आई हैं कि कार्यक्रमों के नाम पर पूर्व बिशप की पत्नी नोरा सिंह स्कूलों से चंदा वूसली थी। जिसका कोई लेखा जोखा नहीं रहता था। जिसे भी पूर्व बिशप हजम कर जाता था।

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