फर्जी नर्सिंग कॉलेज मामले में सुनवाई बढ़ी

जबलपुर: प्रदेश में फर्जी तथा नियम विरुद्ध तरीके से संचालित नर्सिंग कॉलेजों को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गयी थी। याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने पूर्व में मप्र नर्सिंग रजिस्ट्रेशन कौसिंल के रजिस्ट्रार को तत्काल निलंबित कर प्रशासक नियुक्त करने के आदेश जारी किये थे। याचिका पर बुधवार को सुनवाई के दौरानव्यक्तिगत कारणों से पैरोकार के अनुपस्थित रहने के संबंध में नर्सिंग कॉलेज के आवेदन पेश किया। जिसके बाद न्यायालय ने मामले की सुनवाई मुलतवी
कर दी।
लॉ स्टूडेंट्स एसोशिएशन के अध्यक्ष विशाल बघेल की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि शैक्षणिक सत्र 2020-21 में प्रदेश के आदिवासी बाहुल्य इलाकों में 55 नर्सिंग कॉलेज को मान्यता दी गयी थी। मप्र नर्सिंग रजिस्टेशन कौसिंल ने निरिक्षण के बाद इन कॉलजों की मान्यता दी थी।वास्तविकता में यह कॉलेज सिर्फ कागज में संचालित हो रहे है। ऐसा कोई कॉलेज नहीं है जो निर्धारित मापदण्ड पूरा करता है। अधिकांश कॉलेज की निर्धारित स्थल में बिल्डिंग तक नहीं है।

कुछ कॉलेज सिर्फ चार.पांचकमरों में संचालित हो रहे है। ऐसे कॉलेज में प्रयोगशाला सहित अन्य आवश्यक संरचना नहीं है। बिना छात्रावास ही कॉलेज का संचालन किया जा रहा है। नर्सिंग कॉलेज को फर्जी तरीके से मान्यता दिये जाने के आरोप में मप्र नर्सिंग रजिस्ट्रेशन कौसिंल के रजिस्ट्रार को पद से हटा दिया गया था। फर्जी नर्सिंग कॉलेज संचालित होने के संबंध में उन्होने शिकायत की थी। शिकायत पर कोई कार्यवाही नहीं होने के कारण उक्त याचिका दायर की गयी है। याचिका में साथ ऐसे कॉलेज की सूची तथा फोटो प्रस्तुत किये गये थे।

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