सेंट्रल इंडिया किडनी अस्पताल पहुंची एसआईटी

चिकित्सकों समेत पैथोलाजी स्टाफ के बयान किए दर्ज
जबलपुर: सेंट्रल इंडिया किडनी अस्पताल द्वारा होटल वेगा में आयुष्मान कार्डधारी भर्ती कर शासन को करोड़ों की चपत लगाने के प्रकरण में एसआईटी बुधवार को अस्पताल पहुुंची और चिकित्सकों समेत पैथोलॉजी स्टाफ के बयान दर्ज किए। इसके साथ ही दस्तावेजों को भी खंगाला गया। देर रात तक एसआईटी अस्पताल में मौजूद रही। इस दौरान एसआईटी को नई जानकारियां हासिल हुई हैं। जिसमेें नए खुलासे होने की उम्मीद हैं। विदित हो कि आयुष्मान योजना में फर्जीवाड़ा करने वाली अस्पताल संचालिका दुहिया पाठक और उसका पति डा. अश्विनी कुमार पाठक अभी जेल में हैं।
13 करोड़ से अधिक का है फर्जीवाड़ा
विदित हो कि किडनी अस्पताल में आयुष्मान योजना के तहत फर्जीवाड़ा होने की सूचना पर पुलिस ने छापा मार कार्रवाई की थी। इस दौरान 30 मरीज मिले थे। सभी आयुष्मान कार्ड धारी थे। जांच में पाया गया था कि सभी सामान्य बीमार हैं जिन्हें फाइलों में गंभीर बीमारियां होना बताया गया था। जिसके बाद पुलिस ने डॉक्टर पाठक दंपत्ति समेत अस्पताल मैनेजर के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया था। यह पूरा फर्जीवाड़ा 13 करोड़ से अधिक बताया जा रहा हैं।
देर रात तक होते रहे बयान दर्ज
बुधवार को भेड़ाघाट थाना प्रभारी एवं प्रकरण के विवेचक शफीक खान अपनी टीम के साथ पहुंचे और पैथोलाजी स्टाफ के बयान दर्ज किए। बताया जाता हैं कि डॉक्टरों के बयान भी दर्ज किए गए हैं देर रात तक एसआईटी अस्पताल में मौजूद रही। पूछताछ के दौरान एसआईटी को नई जानकारियां हाथ लगी हैं।
एक्सपर्ट ने शुरू की हस्ताक्षरों की जांच
मरीजों की फाइलों में तीन चिकित्सकों के फर्जी हस्ताक्षर पाए गए थे। जिसमें दो पैथोलॉजिस्ट एवं एक अन्य डाक्टर के हस्ताक्षर शामिल हैं। मरीजों की फाइल में विजीटर डाक्टर के नाम पर डा. संदीप भगत के हस्ताक्षर मिले थे। इसके अलावा पैथोलाजी की रिपोर्ट में लैब डायरेक्टर के नाम पर डा. वंदना के हस्ताक्षर पाए गए थे। डा. संजय तोतड़े के डिजीटल हस्ताक्षर पाए गए थे। तीनों डाक्टरों ने उक्त हस्ताक्षर फर्जी बताये थे। इसके साथ ही सेंट्रल इंडिया किडनी अस्पताल से संपर्क में होने से साफ मना कर दिया था। एसआइटी ने तीनों के हस्ताक्षर के नमूने लिए है। उन नमूनों को जांच के लिए राइटिंग एक्सपर्ट के पास भेजा भेजा गया है। हैंड राइटिंग एक्सपर्ट ने जांच शुरू कर दी हैं।

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