महापौर पद के लिए विधायकी पर दांव लगाना मंजूर नहीं मैंदोला को

सियासत

महापौर पद के लिए सबसे ऊपर चल रहे रमेश मैंदोला ने रविवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान प्रदेश भाजपा अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा और राष्ट्रीय संगठन मंत्री शिव प्रकाश से मुलाकात कर चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया. उन्होंने कहा कि मेरे नाम पर विचार नहीं किया जाए. जैसे ही यह खबर सोशल मीडिया पर फैली इंदौर में हलचल मच गई। रमेश मेंदोला के समर्थक विशेष रूप से हरकत में आ गए। पता चला कि कैलाश विजयवर्गीय की सलाह पर रमेश मैंदोला ने ऐसा किया है। कैलाश विजयवर्गीय भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव हैं उन्हें मालूम है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा किस तरह से सोचते हैं। कैलाश विजयवर्गीय ने यह अनुमान लगा लिया कि यदि रमेश मैंदोला महापौर बनते हैं तो 2023 में उनका विधानसभा टिकट खतरे में आ सकता है.

पार्टी यह कहकर रमेश मैंदोला को दौड़ से बाहर कर सकती है कि वह महापौर जैसे पद पर हैं इसलिए उन्हें एक पद एक व्यक्ति के सिद्धांत के आधार पर विधानसभा का टिकट नहीं दिया जाएगा. रमेश मेंदोला क्षेत्र क्रमांक 2 से अपनी दावेदारी बिल्कुल भी छोड़ने के लिए तैयार नहीं है. दरअसल महापौर पद का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है जबकि एक नेता विधानसभा चुनाव बार-बार लड़ सकता है. ऐसे में क्षेत्र क्रमांक 2 जैसी सीट का विधायक महापौर पद के लिए अपनी विधायकी का त्याग क्यों करेगा? जाहिर है रमेश मैंदोला को निर्णय लेने में जरा भी देर नहीं हुई. कैलाश विजयवर्गीय और रमेश मैंदोला ने अपनी रणनीति बदलते हुए सारा मामला मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा पर छोड़ दिया.

सूत्रों के अनुसार रमेश मैंदोला द्वारा इंकार किए जाने के बाद अब डॉ निशिकांत खरे का नाम तेजी से ऊपर आ गया है. उनके अलावा गौरव रणदिवे और उमेश शर्मा भी जोर मार रहे हैं. सूत्रों का यह भी कहना है कि अब फैसला इन तीन नेताओं में से ही होगा. यदि पार्टी ने गौरव रणदिवे को टिकट दिया तो नगर भाजपा की कमान उमेश शर्मा को सौंपी जाएगी. कुल मिलाकर इंदौर को लेकर जो उलझन है उसे पार्टी एक-दो दिन में सुलझा लेगी. यह भी लगभग तय है कि इंदौर का फैसला मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ही करेंगे. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को दिल्ली जाकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से चर्चा की है.

सूत्रों के अनुसार उन्होंने इंदौर, भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर नगर निगम के महापौर प्रत्याशियों के संबंध में चर्चा करने के बाद नाम फाइनल किए हैं. इधर त्रिपुरा के प्रभारी बनाए गए कैलाश विजयवर्गीय शाम को भोपाल लौट आए हैं. उनके आने के बाद कोर समिति की बैठक में इंदौर पर फिर से विचार विमर्श हो रहा है। अपुष्ट सूत्रों का कहना है कि डॉ निशिकांत खरे का नाम तय हो गया है. उन्हें संघ ने सभी जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया है. इसका अर्थ यह है कि उनके नाम की घोषणा बाकी है. हालांकि कैलाश विजयवर्गीय के समर्थक अभी भी आश्वस्त हैं कि अंतिम फैसला रमेश मैंदोला के पक्ष में ही होगा.

नव भारत न्यूज

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