इंदौर में लता मंगेशकर संगीत अकादमी, संग्रहालय और संगीत महाविद्यालय खुलेगा-शिवराज

भोपाल, 6 फरवरी. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि भारत रत्न लता मंगेशकर इंदौर में जन्मी थी और मध्यप्रदेश से उनका गहरा नाता था। इसलिए इंदौर में स्व. लता मंगेशकर के नाम पर संगीत अकादमी स्थापित की जाएगी जहां बच्चे सुरों की साधना करेंगे। एक संग्रहालय भी बनाया जाएगा जिसमें लता दीदी ने जब भी, जो भी गाया है, वह उपलब्ध रहेगा। इंदौर में ही उनकी प्रतिमा स्थापित की जाएगी और उनके जन्मदिन पर हर वर्ष लता मंगेशकर पुरस्कार दिया जाएगा।

सीएम चौहान ने ये ऐलान राजधानी के स्मार्ट पार्क में स्व लता मंगेशकर की स्मृति में पौधरोपण के बाद कहीं। उन्होंने स्मार्ट उद्यान स्वर कोकिला लता मंगेशकर को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनकी याद में संगीत प्रेमियों के साथ वट वृक्ष लगाया। सीएम चौहान ने कहा कि लता दीदी के जाने से मेरे मन में ऐसी रिक्तता आई है, जिसकी भरपाई नहीं की जा सकती। लता दीदी केवल संगीत जगत की ही रोशनी नहीं थीं, वह देशभक्ति का एक ऐसा हस्ताक्षर थीं जिससे पूरा देश यहां तक कि बड़े-बड़े राजनेता भी प्रेरणा लेते थे। उनके जन्मदिन पर अब हर साल लता मंगेशकर पुरस्कार दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि दीदी हम तुम्हें न भुला पाएंगे, उनके चरणों में विनम्र श्रद्धांजलि है। सीएम शिवराज ने कहा कि अपने गीत-संगीत के माध्यम से लता दीदी हमारे बीच बनी रहेंगी। आज उनकी स्मृति में संगीत के ख्यातिनाम साथियों के साथ वट वृक्ष लगाया है। उनके गीत लोगों में नव उत्साह, नव ऊर्जा का संचार करते हैं।

ब्लाग में शेयर किए स्मृतियों के अनुभव

सीएम चौहान ने लता मंगेशकर से जुड़ी स्मृतियों को लेकर ब्लाग में लिखा है कि वर्ष 2017 में जब नर्मदा सेवा यात्रा और पर्यावणर संरक्षण के लिए लोगों तक संदेश पहुंचाने का काम किया था उस समय नर्मदा सेवा यात्रा को लेकर लता दीदी से करीब बीस मिनट बात हुई थी। उन्होंने यात्रा के बारे में जानकारी लेने के बाद प्रयासों की सराहना की थी। बातचीत के दौरान मध्यप्रदेश और नर्मदा नदी को लेकर लता दीदी भावुक हो गई थीं। उन्होंने कहा था कि नर्मदा यात्रा में शामिल होने की बहुत इच्छा रखती हूं किन्तु स्वास्थ्य इस बात की अनुमति नहीं दे रहा है। शिवराज ने लिखा है कि उनकी वाणी और शब्दों में जो अपनापन और स्नेहभाव था, वह कभी भूल नहीं सकता। उनकी आत्मीयता का अहसास एक अमूल्य निधि है। लता दीदी मध्यप्रदेश की बेटी थीं। उनका कर्मक्षेत्र मध्यप्रदेश भले ही नहीं रहा लेकिन उनका दिल हमेशा मध्यप्रदेश के लिए धड़कता था। उन्हें मां सरस्वती का वरदान प्राप्त था और वे महान सुरसाधक होने के साथ महान राष्ट्रभक्त थीं। देश के गीत और संगीत उनके बिना सूने हैं। हर घर सूना है और हृदय घट सूना है। दीदी को संगीत गीत की देवी मानकर दुनिया हमेशा उनकी पूजा करती रहेगी।

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