जनपद पंचायत पवई की ग्राम पंचायतो मे फर्जी बिल बाउचर लगाकर किया जा रहा फर्जीवाडा

पन्ना : मध्यप्रदेश के अति पिछड़े पन्ना जिले में प्रशासन में व्याप्त बेइंतहा भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी सरकारी योजनाओं को दीमक की तरह खोखला करने में लगी है। भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस का दम भरने वाली शिवराज सरकार के राज में पन्ना जिले में हर स्तर पर और हर तरफ जारी खुली लूट की स्याह हकीकत मुख्यमंत्री के दावों को कोरी जुमलेबाज़ी साबित कर रही है। जिले में फिक्स रेट मोड में चल रहे प्रशासन में हर काम का दाम तय है। और निश्चित दाम दिए बिना यहां आम आदमी का कोई काम होता ही नहीं है। चालू वर्ष में जिले अब तक लोकायुक्त पुलिस के द्वारा रिश्वतख़ोर अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ की गई एक से बढ़कर एक ट्रैप कार्यवाही इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है।

लोकायुक्त पुलिस की लगातार कार्यवाही के बाद भी पन्ना में जमे भ्रष्ट अफसर बैखौफ होकर न सिर्फ रिश्वत की मांग कर रहे हैं बल्कि बड़े मजे से ले भी रहे हैं। रिश्वत लेने के लिए उनके द्वारा तरह-तरह के हथकण्डे अपनाकर लोगों को परेशान किया जा रहा है। ऐसा ही एक गंभीर मामला जिले की पवई जनपद में सामने आया है। पवई के आधा दर्जन सरपंचों ने जनपद पंचायत में पदस्थ मनरेगा के एसडीओ ् (सहायक यंत्री) महेश प्रसाद गर्ग पर निर्माण कार्यों में कमीशन/रिश्वत लेने के लिए परेशान करने तथा पद का दुरूपयोग करते हुए अवैध वसूली के लिए अनुचित दवाब बनाने के आरोप लगाए है। कथित तौर पर एसडीओ/सहायक यंत्री से परेशान सरपंचों के द्वारा सोमवार 1 नवम्बर को नोरबाजी करते हुए तहसील कार्यालय पहुंचकर अनुविभागीय दण्डाधिकारी पवई रचना शर्मा को पन्ना कलेक्टर के नाम एक ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में सरपंचों ने विस्तार पूर्वक अपनी व्यथा का उल्लेख करते हुए बताया है कि, रिश्वत के लिए उन्हें किस तरह परेशान किया जा रहा है।

मध्यप्रदेश सरपंच संघ इकाई जनपद पंचायत पवई के तत्वाधान में सौंपे गए ज्ञापन के 5 बिंदुओं में उल्लेख किया गया है कि, उपयंत्री द्वारा तैयार किए जाने वाले स्टीमेट की फाइल तकनीकी स्वीकृति के लिए एक-एक माह तक एसडीओ साहब के पास पेंडिंग रहती है। सरपंचों को झूठे आश्वासन देकर लगातार भटकाया जाता है। जिससे काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। उपयंत्रियों के द्वारा निर्माण कार्यों का मूल्यांकन करने के बाद सबंधित बिल-बाउचर का सत्यापन दो-दो माह तक नहीं किया जाता। सहायक यंत्री के द्वारा सत्यापन करने के एवज में राशि (घूस) की मांग की जाती है। इस कारण बिल भुगतान में होने वाले विलंब के चलते मटेरियल सप्लायरों का भुगतान समय पर न होने से सरपंचों/प्रधानों की साख पर विपरीत असर पड़ता है।

नतीजतन दोबारा निर्माण सामग्री या अन्य मटेरियल लेने में सरपंचों को काफी दिक्क्त होती है। मनरेगा एसडीओ (सहायक यंत्री) पर आरोप है कि, वे पंचायतों के निरीक्षण की आड़ में कमीशन और रिश्वत की अवैध वसूली करते हैं। यदि कोई साहब को रुपयों की चढ़ोत्री नहीं चढ़ाता है तो उसके खिलाफ मनमानी कार्यवाही करने की धमकी दी जाती है। पंचायतों के विकास कार्यों की राशि से बड़ी ही चालकी से कमीशन बटोरकर अपनी तिजोरी भरने के लिए एसडीओ साहब पर वेण्डर भाई के नाम के बिल पंचायतों में लगाने के लिए कथित तौर पर दवाब बनाया जाता है। एसडीओ की कारगुजारियों से आजिज आ चुके सरपंच बताते हैं कि साहब कार्यालयीन समय पर कभी अपने कार्यालय में नहीं मिलते, फोन पर संपर्क करने पर अक्सर उनका मोबाइल फोन रिसीव ही नहीं होता है, अगर कभी रिसीव हुआ तो गोलमोल जवाब देकर फोन काट देते हैं।

पवई के सरपंचों ने मनरेगा एसडीओ की अराजकता पूर्ण मनमानी कार्यप्रणाली से त्रस्त होकर उनके साथ कार्य करने में असमर्थता जताई है। सरपंचों ने ज्ञापन के माध्यम से स्पष्ट चेतावनी दी है, यदि महेश प्रसाद गर्ग एसडीओ मनरेगा के खिलाफ कार्यवाही नहीं की गई और उनका स्थानांतरण नहीं किया गया तो समस्त सरपंच/प्रधान सामूहिक इस्तीफ़ा देकर कार्य बंद करने के लिए बाध्य होंगे। गौरतलब है कि पन्ना जिले में रिश्वत का खेल जिस तरीके से खुलेआम चल रहा है उसके मद्देनज़र वरिष्ठ अधिकारियों एवं सत्ता में बैठे सफेदपोश नेताओं-जनप्रतिनिधियों का घोषित-अघोषित तौर पर पूर्ण संरक्षण घूसखोर भ्रष्ट लोक सेवकों को प्राप्त होने की आशंकाओं को लगातार बल मिल रहा है।

इनका कहना हैः-
“शासन ने सहायक यंत्री को सौ फीसदी निर्माण कार्यों का निरीक्षण करने की जिम्मेदारी सौंपी है, इसलिए उसे पूरा करने के लिए प्रत्येक कार्य का मौके पर जाकर निरीक्षण करता हूँ। पवई में अब ऑफिस में बैठ कर निर्माण कार्यों की तकनीकी स्वीकृति जारी नहीं की जाती है, जिससे कुछ लोग असहज हैं। पवई जनपद में 80 से अधिक पंचायतें हैं लेकिन मेरी शिकायत सिर्फ 2-3 सरपंचों ने की है उन्हें भी राजनैतिक लोगों ने बरगलाया है। आप अन्य सरपंचों से मेरे संबंध में पता कर सकते हैं। मैंने तकनीकी स्वीकृति जारी करने के पूर्व मौके पर प्रस्तावित कार्यों की जांच-पड़ताल करके अनेकों गड़बड़ी पकड़ी हैं और वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराकर वास्तविक लागत की तकनीकी स्वीकृति जारी की है। मुझ पर वसूली करने या कमीशन लेने के जो आरोप लगाए गए है वे पूर्णतः असत्य और निराधार हैं।

महेश प्रसाद गर्ग, सहायक यंत्री मनरेगा, जपं पवई जिला पन्ना
“सरपंचों के ज्ञापन को आवश्यक कार्यवाही के लिए कलेक्टर सर को भेज दिया है, मेरे द्वारा जनपद पंचायत की समीक्षा बैठकें लेने के दौरान कभी सरपंचों ने इस तरह की समस्या नहीं बताई। विकासखण्ड की प्रशासनिक प्रमुख होने के नाते मेरी जिम्मेदारी अवश्य बनती है कि मैं समस्याओं का अपने स्तर पर समाधान करूँ, कलेक्टर सर इस मामले में जो भी जांच टीम गठित करेंगे उसकी जांच के आधार पर आगे की कार्यवाही की जाएगी। मेरे पार दो-दो विकासखण्डों की जिम्मेदारी है इसलिए कहां क्या चल रहा कई बार तुरंत पता नहीं लगता है।”
रचना शर्मा, एसडीएम, पवई जिला पन्ना।

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